
लालढांग। लालढांग के प्राचीन काली मंदिर में शारदीय नवरात्र की अष्टमी के अवसर पर भक्तों का तांता लगा रहा। पूरे दिन मंदिर में प्रसाद चढ़ाने का सिलसिला जारी रहा।

नवरात्रि व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं में कुछ भक्तों ने अष्टमी पर हवन-पूजन कर व्रत का समापन किया, तो कुछ श्रद्धालु नवमी पर हवन-यज्ञ कर व्रत का समापन करेंगे। मान्यता है कि अष्टमी के दिन मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं, जिस कारण भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है।
लालढांग का प्राचीन काली मंदिर अपनी विशेषताओं के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। क्षेत्र के श्रद्धालु सप्तमी, अष्टमी और नवमी को मंदिर पहुंचकर प्रसाद चढ़ाते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

इस मंदिर की विशेषता यह है कि मां काली के मंदिर के पास ही भगवान शंकर और हनुमान जी का मंदिर है। विशालकाय पीपल के वृक्ष के नीचे शनिदेव जी विराजमान हैं। मंदिर के एक कोने में झोपड़ी के अंदर धूना लगा हुआ है। सभी मंदिरों में दर्शन करने के बाद श्रद्धालु इस धूने पर आकर माथा टेकते हैं, राख का तिलक लगाते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर के एक कोने में हवन यज्ञशाला बनी हुई है, जहां हवन-अनुष्ठान किया जाता है।

वहीं मंदिर परिसर में एक अलग दृश्य देखने को मिला। श्रीलंका से नीलू नामक युवती मंदिर में एक वृक्ष के नीचे बैठकर किताब के माध्यम से जाप कर रही थी, जिसने वहां पहुंचे श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दर्शन करने आए भक्त उसे देखने और उससे बातचीत करने का प्रयास कर रहे थे। वह टूटी-फूटी हिंदी में जवाब दे रही थी और बता रही थी कि वह श्रीलंका से नवरात्र पर्व पर विशेष रूप से इस मंदिर में दर्शन करने पहुंची है।

काली माता मंदिर के पुजारी भवानी राम ने बताया अष्टमी नवमी रात्रि को 1:30 महा मिशन आरती हवन यज्ञ पूजन के बाद की जाएगी वर्तमान में काली माता मंदिर की महंत की जिम्मेदारी भगवती माई संभाल रही है।

काली मंदिर समिति के अध्यक्ष कैलाश शर्मा ने बताया मंदिर की महंत माता जी के देश नहीं विदेशी भी बहुत भक्त हैं जो समय-समय पर मंदिर में आते रहते हैं।
