*लालढांग/हरिद्वार।* रवासन नदी पर झूला पुल की मांग को लेकर चल रहा महा-आंदोलन तीसरे दिन और भी उग्र हो गया। सोमवार को धरना स्थल पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। पीली पड़ाव के प्रधान शशि झंडवाल सैकड़ों ग्रामीणों के साथ समर्थन में पहुंचे।
ग्रामीणों के इस जज्बे को देखते हुए दोपहर 1 बजे हरिद्वार तहसीलदार सचिन कुमार और श्यामपुर कोतवाली प्रभारी नितेश शर्मा भारी बरसात में ही धरना स्थल पर पहुंचे। आलम यह था कि छाता भी उन्हें भीगने से नहीं बचा पाया। दोनों अधिकारियों ने 2 घंटे तक छाते के सहारे खड़े होकर बारिश में भीगते हुए ग्रामीणों से वार्ता का इंतजार किया।


तीसरे दिन धरने ने इम्तिहान लिया। मूसलाधार बारिश में टेंट के अंदर बाहर से ज्यादा पानी भर गया, लेकिन महिलाएं लता देवी, लीला देवी, मंगला देवी, हंसी देवी, सुलोचना देवी, तुलसी देवी, शोभा देवी, आनंदी देवी, कमला देवी, कांति देवी आदि के साथ ग्रामीण उसी पानी में बैठे रहे। बारिश के पानी की परवाह किए बिना सभी “पुल बनाओ” के नारे लगाते रहे।
जिला पंचायत सदस्य बृज मोहन पोखरियाल ने कहा – “हमें कागज नहीं, जमीन पर काम चाहिए। हमारी आवाज जिलाधिकारी और सचिव तक जानी चाहिए।”
ग्रामीणों का एक ही ऐलान है – *पुल निर्माण शुरू करो, तभी धरना खत्म होगा।*
लगभग 3 बजे वार्ता हुई। तहसीलदार ने कहा कि झूला पुल के पहले फेज का बजट पास हो चुका है, कागजी कार्रवाई पूरी कर जल्द फाइल शासन को भेजी जाएगी और धरना समाप्त करें। लेकिन भीग रहे ग्रामीणों ने मौखिक आश्वासन को ठुकरा दिया।

धरने में दीपक जखमोला, राकेश बिष्ट, चंद्र मोहन पोखरियाल, सुधीर डबराल, केशव दत्त उप्रेती, दिनेश देवराज, जितेंद्र गुप्ता, पंकज चमोली, ग्राम प्रधान कमलेश द्विवेदी, शशि पाल सिंह झंडवाल, मोहम्मद अहसान, दिनेश चंद्र बड़ोनी, विनोद जोशी, सुरेंद्र रावत, बबलू सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
