
महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज के सानिध्य में श्री विश्वनाथ धाम में धूमधाम से मनाया गया गणेशोत्सव*

गणेश चतुर्थी शुभारम्भ का पूजन करतीं एम्स ऋषिकेश की निदेशक श्रीमती मीनू सिंह।
*हरिद्वार।* महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज के सानिध्य में उनके भोपतवाला स्थित आश्रम श्री विश्वनाथ धाम में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान गणेश के प्राकट्य दिवस को गणेशोत्सव के रूप में पूर्ण शास्त्रीय विधि-विधान एवं धूमधाम से मनाया गया।
भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाए गए इस पर्व में महाराज श्री के देशभर से आए अनेक शिष्य-भक्तों ने भाग लिया। इस अवसर पर भगवान गणेश के पूजन-अर्चन का कार्य काशी के वैदिक विद्वान सुनील दीक्षित के नेतृत्व में सैकड़ों विद्वान आचार्यों ने महाराज जी के शिष्य-भक्तों द्वारा संपन्न कराया।
ज्ञात हो कि भारतीय शास्त्रीय परम्परा के अनुसार भगवान गणेश का अर्चन आठ वस्तुओं से किया जाता है, जिसे वे बड़े मनोभाव से स्वीकार करते हैं। स्वामी प्रखर जी महाराज के अनुसार गणेश पुराण में स्वयं भगवान गणेश ने कहा है कि मेरे जन्मोत्सव के अवसर पर जो भक्त मेरा पूजन-अर्चन आठ वस्तुओं से करता है, मैं उसके सभी मनोरथ पूर्ण करता हूं।
श्री विश्वनाथ धाम आश्रम में पूजन-अर्चन परम्परा का पालन करते हुए इस बार भगवान गणेश का अर्चन 16000 लड्डू, 16000 केला, 16000 गन्ना, 16000 चिड़वा, 16000 धान की खील व सत्तू तथा दूर्वा आदि से किया गया तथा उसके अनुरूप ही तर्पण भी किया गया।
14 सितम्बर आज श्री विश्वनाथ धाम आश्रम में प्रातः 9:30 बजे गणेश पूजन का क्रम प्रारम्भ हुआ तथा 10:30 बजे से अष्ट द्रव्य अर्चन का कार्यक्रम आरम्भ किया गया। भगवान गणेश को अष्ट द्रव्य अर्चन का यह क्रम अपराह्न 4 बजे तक अनवरत जारी रहा। भगवान चिंतामणि गणेश का वह पूजन उन्हीं को लक्ष्य करके संपन्न कराया गया। उसके पश्चात अष्ट द्रव्य से हवन कर गणेश अर्चन की पूर्णाहुति संपन्न कराई गई।
शंकराचार्य मार्ग, शिवनगर, भोपतवाला में स्थित श्री विश्वनाथ धाम आश्रम में भगवान गणेश पूजन एवं अर्चन के अवसर पर वहां से उठ रही मंत्र ध्वनि से पूरा वातावरण गणेशोत्सवमय हो उठा था। आश्रम के सभागार में आयोजित पूजन-अर्चन कार्यक्रम में सैकड़ों भक्तों एवं आचार्यों द्वारा किए गए अर्चन का वह दृश्य अभूतपूर्व नजर आ रहा था।
पूजन-अर्चन कार्यक्रम के पश्चात महाराज श्री ने शिष्य-भक्तों को दिए आशीर्वचन में बताया कि भगवान गणेश के पूजन-अर्चन का यह कार्य भक्तों के सभी मनोरथों को पूरा करने वाला, पुण्यदायी एवं दर्शनीय होता है। यह सिर्फ पूजन-अर्चन में भाग लेने वाले भक्तों को ही नहीं बल्कि दर्शनार्थियों को भी पुण्य फल प्रदान करने वाला होता है। इस अवसर पर भगवान गणेश के पूजन-अर्चन वाले आयोजन का क्षेत्रवासियों ने भी दिव्य दर्शन कर पुण्यार्जन किया। गणेशार्चन की पूर्णाहुति के पश्चात भगवान गणेश को अर्पित अष्ट द्रव्यों को प्रसाद के रूप में सभी दर्शनार्थी भक्तों सहित पूरे क्षेत्र के लोगों में वितरित किया गया।

