लालढांग के लालाओमप्रकाश ज्ञानदीप इंटर कॉलेज में डॉ० इंद्रमणि बडोनी जी की100 वी जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रम कर धूमधाम से मनाई गई
लालढांग
उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले डा० इंद्रमणि बडोनी की 100वीं जयंती पर जहां प्रदेश भर में उनकी जयंती पर संस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद किया गया वही लाल ढांग के लालाओमप्रकाश ज्ञानदीप इंटर कॉलेज में डॉक्टर इंद्रमणि बडोनी जीके 100 वें जन्मदिन के अवसर पर लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लालढांग ग्राम प्रधान सुनील बिष्ट द्वारा दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया गया कार्यक्रम में बोलते हुए सुनील बिष्ट ने कहा डॉक्टर इंद्रमणि बडोनी जी को उत्तराखंड का गांधी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन उत्तराखंड की जनता के अधिकारों और अलग राज्य की मांग के लिए समर्पित कर दिया। वे सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण आंदोलनों में विश्वास रखते थे, बडोनी का जीवन सादगी और त्याग का प्रतीक था। सुनील बिष्ट ने छात्र छात्राओं को इंद्रमणि बडोनी जी के पद चिन्हों पर चलने की प्रेरणा दी।
डा० इंद्रमणि बडोनी की 100 जयंती के उपलक्ष में विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रमों आयोजन किया गया वही सभी जयंती को यादगार मनाने के उपलक्ष में विद्यालय में विशाल गढ़ भोज का आयोजन किया गया गढ भोज में भात, आलू का छिताणी, गहतकाफाणु ,पहाड़ी दाल, आदि बनाए गए।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार कार्य क्रमका संचालन प्रकाश डोबरियाल कपिल देव कार्यक्रम संयोजक जयचंद चतुर्वेदी सुभाष सैनी, मुन्नी पवार, संजू गोसाई अजय बिष्ट, विकास कमल, मनोज जोशी, अखिलेश बुडाकोटी, जगदीश प्रसाद, स्वर्णलता, अमिता बिष्ट, आदि छात्र-छात्राऐं उपस्थित रहे।
लालाओमप्रकाश ज्ञानदीप इंटर कॉलेज में डॉ० इंद्रमणि बडोनी जी की100 वी जयंती पर हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम
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लालढांग के लालाओमप्रकाश ज्ञानदीप इंटर कॉलेज में डॉ० इंद्रमणि बडोनी जी की100 वी जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रम कर धूमधाम से मनाई गई
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लालढांग ग्राम प्रधान सुनील बिष्ट द्वारा दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया गया कार्यक्रम में बोलते हुए सुनील बिष्ट ने कहा डॉक्टर इंद्रमणि बडोनी जी को उत्तराखंड का गांधी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन उत्तराखंड की जनता के अधिकारों और अलग राज्य की मांग के लिए समर्पित कर दिया। वे सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण आंदोलनों में विश्वास रखते थे, बडोनी का जीवन सादगी और त्याग का प्रतीक था। सुनील बिष्ट ने छात्र छात्राओं को इंद्रमणि बडोनी जी के पद चिन्हों पर चलने की प्रेरणा दी।


